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भारतीय कंपनियों में चीन का निवेश

हाल के महीनों में चीन के वेंचर फंड्स ने भारतीय कंपनियों में काफी दिलचस्पी दिखाई है। फोसुन, दीदी, टेनसेंट और शाओमी सरीखी जानी-पहचानी कंपनियों और फंड्स के अलावा शुनवेई, होराइजंस और साइनोवेशन जैसी चीनी कंपनियां भी भारत में खरीदारी के मौके तलाश रही हैं।

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सेंट्रम इंफ्रास्ट्रक्चर के एमडी संदीप उपाध्याय ने कहा कि चीन के वेंचर फंड्स की भारत की हाई-ग्रोथ कंपनियों में दिलचस्पी बढ़ी है। उपाध्याय ने कहा, ‘महामारी का सबसे खराब दौर चीन में खत्म हो चुका है, वहीं भारत की कई लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों का वैल्यूएशन आकर्षक दिख रहा है। पेमेंट्स (पेटीएम), मोबिलिटी (ओला), ईकॉमर्स सेक्टर , रिन्यूएबल एनर्जी, फार्मास्युटिकल्स, मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टरों में चीन के निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।’

बिगबास्केट में अलीबाबा का करीब 25 करोड़ डॉलर का निवेश है। बायजूज में चीन की टेंसेंट होल्डिंग्स ने करीब 5 करोड़ डॉलर का निवेश किया है। डेल्हिवरी में फोसुन ने करीब 2.5 करोड़ डॉलर लगाए हैं। ड्रीम 11 में स्टेडव्यू कैपिटल और टेंसेंट का 15 करोड़ डॉलर का निवेश है। हाइक में टेंसेंट और फॉक्सकॉन का 15 करोड़ डॉलर का निवेश है, वहीं ANI टेक्नॉलजीज (ओला ) में चीन की कंपनियों का 50 करोड़ डॉलर का निवेश है। पेटीएम मॉल में अलीबाबा ग्रुप ने 15 करोड़ डॉलर लगाए हैं, जबकि पेटीएम में 40 करोड़ डॉलर। ओयो में चीन की कंपनियों के 10 अरब डॉलर का निवेश है। जोमैटो में अलीबाबा और शुनवेई के करीब 20 करोड़ डॉलर का निवेश है। ये सभी यूनिकॉर्न हैं, इनके अलावा भी कई यूनिकॉर्न्स हैं, जिनमें चीन की कंपनियों का बड़ा निवेश है। (यूनिकॉर्न उस स्टार्टअप को कहा जाता है जिसका वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर से अधिक का है।)

Dilip Kumar

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