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कोरोना मरीज के पास 9 घंटे बाद पहुंची एंबुलेंस

दिल्ली के रोहिणी के विजय विहार इलाके में रहने वाले 54 वर्षीय एक व्यक्ति के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद उसे और उसके परिवार को जिस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा, वह सरकार के दावों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। विजय विहार में रहने वाले बघेल परिवार को उनके एक वरिष्ठ सदस्य के कोरोना संक्रमित होने की जानकारी बुधवार की सुबह चली। कोरोना के खौफ के अलावा परिवार को जांच रिपोर्ट के परिणाम पर आश्चर्य इस बात का था कि संक्रमित सदस्य टायफाइड के इलाज के लिए नजदीक के सरकारी अस्पताल में भर्ती था।

25 अप्रैल को टायफाइड के इलाज के लिए जयपुर गोल्डन अस्पताल में भर्ती किया गया था। अस्पताल ने दो दिन बाद अचानक उन्हें छुट्टी देते हुए उन्हें किसी सरकारी अस्पताल से कोरोना वायरस की जांच कराने को कहा । डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर अस्पताल कोरोना के कारण बंद था इसके बाद उन्हें एक निजी लैब से जांच करानी पड़ी, जिसकी रिपोर्ट 30 अप्रैल की सुबह आई जिसमें व्यक्ति के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई।

कई जगह शिकायत करने और मदद के लिए गुहार के करीब नौ घंटे बाद एंबुलेंस आई। कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के बेटे का आरोप है की उनके पिता को ‘‘शाम को एलएनजेपी अस्पताल ले जाया गया लेकिन बिस्तर न मिलने के कारण करीब चार-पांच घंटे बैठाकर रखा गया और खाना भी नहीं दिया।उन्हें अगले दिन सुबह नौ बजे के करीब चाय दी गई और तब तक उनका कोई इलाज शुरू नहीं किया गया।

उन्होंने शिकायत की कि बड़ी-बड़ी सुविधाओं से लैस होने का दावा करने वाली राष्ट्रीय राजधानी में वैश्विक महामारी के दौरान हालात ऐसे हैं कि उन्हें घर में रहने और जांच के बारे में कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए और न ही किसी अधिकारी ने उनके परिवार की सुध ली ।

Dilip Kumar

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